डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने ब्राह्मणों को मनाने के लिए चल दी बड़ी चाल
Editor : 24 Adda Official | 19 February, 2026
उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक बड़ा विवाद हुआ है, जिसे शंकराचार्य विवाद कहा जा रहा है। यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले में हुआ, जहाँ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ गए कुछ युवा ब्राह्मण छात्रों (जिन्हें बटुक कहते हैं) के साथ पुलिस ने कथित रूप से बदसलूकी की।
Source or Copyright Disclaimer
खासकर उनकी शिखा (चोटी या बालों की छोटी चोटी, जो ब्राह्मण परंपरा में महत्वपूर्ण होती है) को खींचने की घटना हुई। इस घटना ने पूरे राज्य में बहुत गुस्सा पैदा कर दिया, खासकर ब्राह्मण समाज में। लोग इसे धार्मिक अपमान मान रहे थे।
इस विवाद के बाद बहुत सारी राजनीतिक हलचल मची। विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी और बसपा ने सरकार पर हमला बोला। लोग कहने लगे कि सरकार ने ब्राह्मणों का अपमान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान अलग थे, लेकिन उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कुछ दिन पहले ही एक इंटरव्यू में कहा था कि किसी की शिखा खींचना बहुत बड़ा पाप है। उन्होंने इसे गलत बताया और कहा कि सनातन धर्म में परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है।
ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों (युवा ब्राह्मण विद्यार्थियों) को बुलाया। यह कार्यक्रम काफी भावुक और धार्मिक तरीके से हुआ। ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी नम्रता पाठक के साथ मिलकर इन बटुकों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ?
- बटुकों पर फूलों की वर्षा की गई।
- उन्हें फूलों की माला पहनाई गई।
- उनके माथे पर तिलक लगाया गया।
- उनकी शिखा का विशेष सम्मान किया गया, हाथ जोड़कर आदर दिखाया।
- ब्रजेश पाठक ने खुद हाथ जोड़कर इन बटुकों से आशीर्वाद लिया।
- पूरे समय ब्राह्मण परंपरा और संस्कृति का सम्मान दिखाया गया।
क्योंकि यह विवाद के बाद हुआ। कई लोग इसे सरकार का डैमेज कंट्रोल (नुकसान कम करने की कोशिश) मान रहे हैं। ब्रजेश पाठक ने दिखाया कि वे ब्राह्मण समाज की भावनाओं का सम्मान करते हैं और अपमान की घटना से दुखी हैं। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि ब्राह्मण परंपराओं और बटुकों का आदर करे।
लेकिन इस सम्मान कार्यक्रम पर भी विवाद हुआ। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे दिखावा बताया। उन्होंने कहा, "पहले मारते हो, फिर फूल चढ़ाते हो।" उन्होंने ब्रजेश पाठक पर तंज कसा कि यह असली माफी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वे 11 मार्च को लखनऊ में मार्च निकालेंगे। शंकराचार्य ने इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी एक तरह का तमाचा बताया, क्योंकि ब्रजेश पाठक का रुख सरकार से अलग लग रहा था।
यह पूरा मामला अब सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक भी हो गया है। ब्राह्मण वोट बैंक यूपी की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रजेश पाठक खुद ब्राह्मण समुदाय से हैं, इसलिए उन्होंने यह कदम ब्राह्मण समाज को संदेश देने के लिए उठाया। कुछ लोग कहते हैं कि यह सियासी चाल है, ताकि ब्राह्मण समाज नाराज न हो। वहीं कुछ इसे सच्ची भावना मानते हैं, क्योंकि ब्रजेश पाठक ने पहले भी शिखा खींचने को पाप कहा था।
बटुक कौन होते हैं?
बटुक छोटे उम्र के ब्राह्मण लड़के होते हैं, जो संस्कृत पढ़ते हैं और गुरुकुल या आश्रम में रहकर वेद-शास्त्र सीखते हैं। उनकी शिखा (चोटी) ब्रह्मचर्य और धार्मिक पहचान का प्रतीक होती है। किसी की शिखा खींचना उनके लिए बहुत बड़ा अपमान माना जाता है।
कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि कैसे एक छोटी सी घटना (माघ मेले में हुई बदसलूकी) से बड़ा विवाद बन जाता है। ब्रजेश पाठक का 101 बटुकों को सम्मानित करना एक तरफ ब्राह्मण समाज को खुश करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ शंकराचार्य के विरोध से विवाद और बढ़ गया है। यूपी की राजनीति में ब्राह्मण मुद्दा हमेशा गर्म रहता है, और यह घटना उसकी एक नई मिसाल है।